इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी मृत व्यक्ति के नाम आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) का नोटिस जारी करना कानून की दृष्टि में पूरी तरह अमान्य है।
अदालत ने कहा कि यह अधिकार क्षेत्र से जुड़ी ऐसी मूलभूत त्रुटि है, जिसे बाद में कानूनी उत्तराधिकारी को पक्षकार बनाकर या तकनीकी भूल बताकर वैध नहीं बनाया जा सकता।
कानून में आवश्यक संशोधन पर विचार करने का आग्रह
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने आशा दुबे की याचिका स्वीकार करते हुए मृतक के नाम जारी नोटिस, उसके आधार पर पारित पुनर्मूल्यांकन आदेश और कर मांग को निरस्त कर दिया। साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय को आदेश की प्रति भेजने का निर्देश देते हुए संसद से इस संबंध में कानून में आवश्यक संशोधन पर विचार करने का आग्रह किया।