चीन का एडवांस्ड J-16 फाइटर जेट राफेल लड़ाकू विमान के साथ सैन्य ट्रेनिंग करने वाला है। इससे बीजिंग को पश्चिमी प्लेटफॉर्म के मुकाबले अपनी क्षमताओं को परखने का एक दुर्लभ मौका मिलेगा। इससे पहले पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान फ्रांसीसी कंपनी के विमानों के खिलाफ चीन के J-10 की कॉम्बैट परफॉर्मेंस ने काफी ध्यान खींचा था। अब आशंका ये है कि राफेल के सीक्रेट फीचर्स के बारे में चीनी वायुसेना को दुर्लभ जानकारी मिल सकती है जिसका इस्तेमाल वो भारत के खिलाफ प्लानिंग में कर सकता है।
मिस्र की सेना की ओर से जारी तस्वीरों के मुताबिक J-16 और डसॉल्ट राफेल इस साल मिस्र में होने वाली 'ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन' जॉइंट एयर एक्सरसाइज में हिस्सा ले रहे हैं। EAF ने एक बयान में कहा कि एक्सरसाइज का दूसरा दौर शनिवार को शुरू हुआ और यह कई दिनों तक चलेगा।
राफेल के साथ J-16 का अभ्यास, सीक्रेट लीक होने का खतरा?
J-16 और J-10 चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स की तरफ से इस्तेमाल किए जाने वाले 4.5-जेनरेशन के फाइटर जेट हैं जिनमें मॉडर्न एवियोनिक्स, एडवांस्ड रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम लगे हैं। AVIC शेनयांग द्वारा बनाए गए J-16 में दो इंजन और दो सीटें हैं। यह J-10 से बड़ा और भारी है और इसे लंबी दूरी के मिशन के लिए डिजाइन किया गया है। चीन ने 2025 में 'ईगल्स ऑफ़ सिविलाइज़ेशन' के लिए J-10 भेजे थे।
मई 2025 में भारत के खिलाफ संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने पहली बार बड़े पैमाने पर J-10C फाइटर जेट का इस्तेमाल किया था। भारतीय वायु सेना का कहना है कि टकराव के दौरान उसने पाकिस्तान के लगभग एक दर्जन विमानों को नष्ट कर दिया था। इनमें कम से कम पांच एडवांस्ड फाइटर जेट शामिल थे जैसे कि अमेरिका में बने F-16 या चीन में बने JF-17 क्लास के जेट। दूसरी तरफ मिस्र अमेरिका का भी एक रणनीतिक साझेदार है जिसकी सेना अमेरिकी F-16 फाइटर जेट के साथ-साथ CH-47 चिनूक और AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करती है।
Rafale Vs J-16 विमान में कौन शक्तिशाली?
फ्रांसीसी राफेल और चीन का J-16 दोनों ही 4.5 पीढ़ी के बेहद ताकतवर लड़ाकू विमान हैं। तकनीकी और आधुनिक युद्ध प्रणालियों के मामले में राफेल अपने बेहतरीन सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और मेटोर मिसाइल की वजह से ज्यादा घातक माना जाता है। जबकि J-16 भारी पेलोड क्षमता, बड़ी रेंज और बड़े रडार सिस्टम में मजबूत है। J-16 को चीन ने रूसी Su-30 डिजाइन के आधार पर बनाया है। यह आकार में बड़ा है और राफेल की तुलना में ज्यादा मात्रा में हथियार ले जा सकता है।